
KRIBHCO (कृषक भारती सहकारी लिमिटेड)
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था सदियों से किसानों की मेहनत और सहयोग की शक्ति पर टिकी रही है। इस सहयोग को संगठित रूप देने में सहकारी संस्थाओं ने अभूतपूर्व योगदान दिया है। इन्हीं संस्थाओं में KRIBHCO (कृषक भारती सहकारी लिमिटेड) का नाम विशेष महत्व रखता है। 1980 में गठित यह सहकारी संगठन आज उर्वरक उत्पादन, कृषि विकास और ग्रामीण सशक्तिकरण में अग्रणी है।
स्थापना और इतिहास
- KRIBHCO की स्थापना 17 अप्रैल 1980 को सहकारिता सिद्धांतों पर आधारित एक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में हुई।
- इसका मुख्य उद्देश्य था—किसानों को सस्ते और गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना तथा सहकारिता आंदोलन को मजबूत करना।
- इसका मुख्यालय नोएडा, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
- 1980 के दशक में भारत को हरित क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए उर्वरकों की बड़ी आवश्यकता थी। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए किसानों और सहकारी समितियों के सहयोग से KRIBHCO का गठन हुआ।
संगठनात्मक स्वरूप
- KRIBHCO एक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी है।
- इसमें देशभर की हजारों सहकारी समितियाँ सदस्य हैं।
- इसका संचालन किसानों के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है, जिससे यह संस्था पारदर्शी और लोकतांत्रिक ढांचे पर चलती है।
KRIBHCO की प्रमुख उपलब्धियाँ
1. उत्पादन क्षमता
- KRIBHCO के पास हजीरा (गुजरात) में विश्वस्तरीय उर्वरक संयंत्र है।
- इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता है:
- 23 लाख मीट्रिक टन यूरिया
- 13 लाख मीट्रिक टन अमोनिया
- यह संयंत्र एशिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक संयंत्रों में से एक माना जाता है।
2. किसानों तक पहुँच
- KRIBHCO का नेटवर्क पूरे देश में फैला है।
- इसके माध्यम से लगभग 1 करोड़ से अधिक किसान सीधे जुड़े हैं।
- सहकारी समितियों के जरिए यह संस्था ग्रामीण भारत तक अपनी सेवाएँ पहुँचाती है।
3. नवाचार और अनुसंधान
- KRIBHCO ने बायो-फर्टिलाइज़र और माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स के क्षेत्र में अनुसंधान किया है।
- जैविक और सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए संस्थान लगातार नए प्रयोग कर रहा है।
4. ग्रामीण विकास और CSR
- शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और महिला सशक्तिकरण में KRIBHCO ने बड़े पैमाने पर कार्य किए हैं।
- हर साल करोड़ों रुपये सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) गतिविधियों में निवेश किए जाते हैं।
आंकड़ों के साथ KRIBHCO की ताकत
- स्थापना: 1980
- मुख्यालय: नोएडा, उत्तर प्रदेश
- प्रमुख संयंत्र: हजीरा (गुजरात)
- वार्षिक उत्पादन क्षमता:
- यूरिया: 23 लाख मीट्रिक टन
- अमोनिया: 13 लाख मीट्रिक टन
- किसानों तक पहुँच: 1 करोड़+
- सहकारी समितियाँ: हजारों
- CSR निवेश (2022-23): ₹250 करोड़+
- वार्षिक टर्नओवर (2022-23): ₹20,000 करोड़+
किसानों और ग्रामीण भारत पर प्रभाव
- किसानों को उचित दाम पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना।
- जैव-उर्वरकों के उपयोग से कृषि लागत में कमी और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि।
- प्रशिक्षण शिविरों और किसान मेलों के जरिए किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ना।
- महिला किसानों और युवा उद्यमियों को सहकारी आंदोलन में भागीदारी दिलाना।
चुनौतियाँ
- वैश्विक बाज़ार में कच्चे माल (प्राकृतिक गैस) की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
- किसानों में संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूकता की कमी।
- जलवायु परिवर्तन से प्रभावित कृषि उत्पादन।
- निजी उर्वरक कंपनियों से प्रतिस्पर्धा।
भविष्य की योजनाएँ
- नैनो टेक्नोलॉजी
- नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के अनुसंधान और उत्पादन को गति देना।
- ग्रीन एनर्जी
- ग्रीन अमोनिया और ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट में निवेश।
- सौर और पवन ऊर्जा आधारित संयंत्रों का विकास।
- वैश्विक विस्तार
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना।
- अफ्रीका और एशिया के देशों में उत्पादन और आपूर्ति नेटवर्क विकसित करना।
- डिजिटल कृषि सेवाएँ
- किसानों को मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना।
- KRIBHCO ई-बाजार जैसी पहल को मजबूत करना।
- सतत और जैविक कृषि
- जैविक खाद और जैव-कीटनाशक को बढ़ावा देना।
- पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाना।
KRIBHCO आज केवल एक उर्वरक सहकारी संस्था नहीं है, बल्कि किसानों की प्रगति और भारत की खाद्य सुरक्षा का स्तंभ है। 1980 से लेकर आज तक इसने कृषि उत्पादन, ग्रामीण विकास और सहकारी आंदोलन को नई दिशा दी है। आने वाले समय में नैनो टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और वैश्विक विस्तार के साथ KRIBHCO किसानों को और सशक्त करेगा और “सहकार से समृद्धि की ओर” के मंत्र को साकार करेगा।
